उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, कहा- रिफंड के लिए दावे का पीछा जारी रखे कंपनी
Buland Kesari/ जालंधर: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जालंधर ने गो फर्स्ट एयरलाइंस के दिवालिया होने से प्रभावित एक यात्री को राहत देते हुए ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी मेकमाईट्रिप को 15,000 रुपये मुआवजा और मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि कंपनी उपभोक्ता को उसके रिफंड दावे की स्थिति की सही जानकारी देने और आवश्यक सहायता प्रदान करने में विफल रही, जिससे उसे मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी।
हालांकि आयोग ने 2.20 लाख रुपये की मूल राशि के तत्काल भुगतान का आदेश देने से इनकार कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह राशि गो फर्स्ट एयरलाइंस की दिवाला प्रक्रिया से जुड़ी हुई है और इसका अंतिम निर्णय राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) तथा रेजोल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा ही किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
शिकायतकर्ता ने मेकमाईट्रिप के माध्यम से थाईलैंड के क्राबी और फुकेट का “अनवाइंड इन क्राबी एंड फुकेट” नामक टूर पैकेज बुक कराया था। इस पैकेज के लिए उसने 2,20,156.99 रुपये का भुगतान किया था। यात्रा 26 जून 2023 से 2 जुलाई 2023 तक निर्धारित थी।
शिकायत के अनुसार यात्रा शुरू होने से करीब एक सप्ताह पहले उसे फोन पर बताया गया कि पैकेज में शामिल गो फर्स्ट एयरलाइंस की उड़ान रद्द हो गई है। साथ ही कहा गया कि यदि वह नई टिकटें नहीं खरीदता तो उसका पूरा पैकेज प्रभावित हो जाएगा।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि मेकमाईट्रिप ने उसे भरोसा दिलाया कि पहले से जमा कराई गई राशि वापस कर दी जाएगी। इस आश्वासन पर उसने उसी यात्रा के लिए नई टिकटें खरीदीं, जिन पर उसे अतिरिक्त 1,92,996 रुपये खर्च करने पड़े।
रिफंड के लिए लगाता रहा चक्कर
यात्रा पूरी होने के बाद शिकायतकर्ता लगातार अपने 2.20 लाख रुपये के रिफंड की मांग करता रहा। उसने कई ई-मेल भेजे और कंपनी से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद 29 जनवरी 2024 को कानूनी नोटिस भेजा गया। राहत न मिलने पर मामला उपभोक्ता आयोग में पहुंचा।
मेक माई ट्रिप ने झाड़ी जिम्मेदारी
मेकमाईट्रिप ने अपने बचाव में कहा कि वह केवल एक ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म है और वास्तविक सेवा प्रदाता गो फर्स्ट एयरलाइंस थी। कंपनी ने दलील दी कि एयरलाइन के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू होने के बाद सभी रिफंड दावे रेजोल्यूशन प्रोफेशनल के पास चले गए हैं और भुगतान उसी प्रक्रिया के तहत होगा।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसने उपभोक्ताओं की ओर से रिफंड दावे संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दिए हैं और वह स्वयं इस राशि का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार नहीं है।
आयोग ने क्या कहा
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने पूरा भुगतान मेकमाईट्रिप को किया था और पैकेज की पुष्टि भी उसी ने की थी। ऐसे में कंपनी खुद को पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकती।
आयोग ने कहा कि उड़ान रद्द होने के बाद उपभोक्ता को तत्काल राहत या स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उल्टा उसे नई टिकटें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।
फैसले में कहा गया कि गो फर्स्ट एयरलाइंस के खिलाफ चल रही दिवाला प्रक्रिया के कारण मूल रिफंड राशि का आदेश देना संभव नहीं है, लेकिन उपभोक्ता को उचित सहायता और जानकारी न देना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
45 दिन में देना होगा मुआवजा
आयोग ने मेकमाईट्रिप को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता के रिफंड दावे का रेजोल्यूशन प्रोफेशनल के समक्ष लगातार पीछा करे और दावे की स्थिति की पूरी जानकारी उपभोक्ता को उपलब्ध कराए। भविष्य में यदि एयरलाइन से रिफंड प्राप्त होता है तो उसे बिना अनावश्यक देरी के शिकायतकर्ता को सौंपा जाए।
इसके अलावा आयोग ने मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 15,000 रुपये देने का आदेश दिया। यह भुगतान आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर करना होगा।
हजारों यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन हजारों यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी रकम गो फर्स्ट एयरलाइंस के बंद होने और दिवाला प्रक्रिया में जाने के बाद फंस गई थी। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं से पैसा लेने के बाद पूरी तरह जिम्मेदारी से बच नहीं सकते और उन्हें ग्राहकों को आवश्यक सहायता तथा पारदर्शी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

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