Buland kesari/जालंधर में टांडा फाटक के पास स्थित एक कोठी में काम करने वाला नाबालिग पिछले कई दिनों से लापता है। बच्चे की मां कलावती और शिवसेना लायंस के राष्ट्रीय चेयरमैन सुनील कुमार बंटी ने थाना डिवीजन नंबर-3 के एसएचओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस प्रभावशाली कोठी मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित परिवार को ही डरा-धमका रही है।
न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार आज पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा और मामले में निष्पक्ष जांच व जल्द कार्रवाई की मांग की। पीड़ित मां कलावती, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की रहने वाली हैं ने बताया कि उनका 14 वर्षीय बेटा चार महीनों से करुण जैन नामक व्यक्ति की कोठी में काम कर रहा था।
इस दौरान परिवार को बच्चे से मिलने नहीं दिया गया और किसी भी तरह का संपर्क भी नहीं हो पाया। कुछ दिन पहले अचानक कोठी मालिक का फोन आया कि बच्चा पिछले 5 दिनों से घर पर नहीं है और कहीं चला गया है। तब से लेकर आज तक लगभग 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला है।
सीसीटीवी वीडियो के आधार पर पल्ला झाड़ रही पुलिस
जब परेशान मां पुलिस थाने पहुंची तो पुलिस ने कोठी के बाहर का एक सीसीटीवी वीडियो दिखाया, जिसमें बच्चा सही-सलामत घर से बाहर जाता हुआ दिखाई दे रहा है। पुलिस इसी वीडियो को आधार बनाकर कोठी मालिक को क्लीन चिट दे रही है।

सुनील कुमार बंटी का कहना है कि जब बच्चा पिछले चार महीनों से उसी घर में रह रहा था, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी मकान मालिक की बनती है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस इस बात की जांच क्यों नहीं कर रही कि बच्चे को घर के अंदर प्रताड़ित, डराया-धमकाया या मारपीट तो नहीं की गई।
एसएचओ पर मालिक को बचाने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि थाना नंबर 3 के एसएचओ इस मामले में कोठी मालिक पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। एसएचओ इस मामले को साधारण किडनैपिंग का रूप देकर रसूखदार मालिक को बचाना चाहते हैं।
SHO ने पीड़ित महिला को धमाकाया
हद तो तब हो गई जब एसएचओ ने पीड़ित विधवा महिला को ही धमकाना शुरू कर दिया। एसएचओ ने महिला से कहा कि उसने नाबालिग बच्चे को काम पर क्यों रखा, इसलिए उल्टा उसी पर पर्चा (मामला) दर्ज कर दिया जाएगा। सुनील भट्टी ने सवाल उठाया कि क्या गरीब होने के कारण इस परिवार को न्याय नहीं मिलेगा?
इंसाफ न मिलने पर रोष प्रदर्शन की चेतावनी
कलावती और सामाजिक प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें केस दर्ज कराने में कोई दिलचस्पी नहीं है। वे सिर्फ अपने बच्चे की सुरक्षित वापसी चाहते हैं। आज पुलिस कमिश्नर जालंधर को एक लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और बच्चे को जल्द से जल्द ढूंढने की मांग की गई है।

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